जुमो, आ रहा स्वयंसेवी संस्थाओं का अपना सोश्यल नेटवर्क
फेसबुक के सह-निर्माता क्रिस ह्यूज़ इस नेटवर्क को बना रहे हैं और उन्होनें इस नेटवर्क के बारे में सोश्यल गुड समिट के दौरान जानकारी दी. क्रिस ह्यूज़ ने जुमो का प्रदर्शन तो नहीं किया परंतु जुमो के क्रियाकलाप के बारे में महत्वपूर्ण बातें बताई.
मेशेबल.कॉम की खबर के अनुसार क्रिस ह्यूज ने जनवरी 12, 2010 के दौरान हैती में आए विनाशक भूकम्प से अपनी बात शुरू की. इस भूकम्प ने लाखों लोगों की जिंदगियों को तबाह कर दिया. असंख्य लोग मारे गए और जो बच गए उनके पास ना तो खाना बचा ना ही कोई काम. परंतु जो एक अच्छी बात देखने में आई वह यह कि लोग हैती की मदद करने के लिए दौड़ पड़े.
इस दौड में महत्वपूर्ण पात्र इंटरनेट ने भी निभाया. उस दिन के बाद से 75000 से अधिक इस घटना से संबंधित समाचार बुलेटिन ओनलाइन स्ट्रीम हुए. हैती के लोगों के लिए 1.3 बिलियन डॉलर की सहायता राशि जमा हो गई. इस घटना ने साबित किया कि लोग एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं. इस घटना ने यह भी साबित किया कि त्रासदी चाहे एक ही प्रकार की हो परंतु जहाँ गरीबी होती है वहाँ अधिक जानहानि होती है.
यहाँ जरूरत आन पड़ती है लोगों का जीवनस्तर सुधारने की, ताकी गरीबी कम हो और इस तरह की विपदाओं से सही तरीके से निपटने के लिए कोई रूपरेखा तैयार हो. इसके लिए दुनिया भर की हजारों संस्थाएँ काम कर रही है. अब जरूरत है लोगों को उनके साथ जोड़ने की और यह काम जुमो करेगा.
क्या होगा जुमो में?
जुमो में तीन मुख्य विभाग होंगे - ढूंढो [Find], फोलो करो [Follow] और सहायता दो [Support]. पहले विभाग के माध्यम से जुमो आपकी रूचि और उद्देश्य के अनुसार उससे मिलता जुलता काम कर रही संस्थाओं की सूचि आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा. आप चाहें तो उनमें से किसी संस्था को फोलो कर पाएंगे. दूसरे विभाग में जुमो आपके द्वारा फोलो की जा रही संस्थाओं की स्ट्रीम आप तक प्रस्तुत करेगी जिससे आप जान पाएंगे कि वह संस्था फिलहाल क्या काम कर रही है. और तीसरे विभाग के माध्यम से आप उनमें से किसी संस्था को सहायता राशि पहुँचा पाएंगे.
एक विशेषता यह है कि इसके लिए आपको बार बार जुमो पर आने की आवश्यकता नहीं होगी. आप यह स्ट्रीम ईमेल अथवा फेसबुक पर भी प्राप्त कर पाएंगे.
सेवाभावी लोगों को आपस में जोडने का यह एक अच्छा प्रयास है. जुमो इस वर्ष के अंत तक लॉंच हो सकता है.
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