दिमाग को पढेगा कम्प्यूटर
जल्द ही टेलिपैथी पर आधार रखकर कार्य करने वाले कम्प्यूटर एक वास्तविकता
होंगे. ये कम्प्यूटर प्रयोक्ता के दिमाग की हलचल को महसूस कर उस हिसाब से
कार्य कर सकेंगे. प्रयोक्ता को सिर्फ निर्देशों को दिमाग में पढना होगा
और कम्प्यूटर उस हिसाब से कार्य करने लग जाएंगे. इस तरह के टेलिपैथी
कम्प्यूटर कभी दूर की कौड़ी लगते थे लेकिन अब नहीं.
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम तैयार किया है जो इंसान
के दिमाग को पढ सकता है. यह सिस्टम ना केवल दिमाग को पढ सकता है बल्कि
पुरानी यादों को भी खंगाल सकता है.
कैसे काम करती है यह तकनीक?
यह तकनीक दिमाग के हिप्पोकैम्पस नामक स्थान पर ध्यान केन्द्रीत करती है.
इस स्थान पर छोटी याद संग्रहित होती है. छोटी याद वह बातें होती है
जिन्हें हम थोड़ी देर के लिए ही याद रखते हैं और उसके बाद या तो भूल जाते
हैं या फिर दिमाग उसमें से कुछ हिस्से को हमेशा के लिए संग्रहित कर लेता
है.
परीक्षण:
इस सिस्टम का परीक्षण करने के लिए 10 स्वयंसेवकों को चुना गया और उन्हें
7-7 सेकंड की 3 फिल्में दिखाई गई. इन फिल्मों में रोजमर्रा का कामकाज
करती महिलाएँ दिखाई गई थी. जैसे कि एक महिला चिट्ठी डालने डाकघर जाती है
और एक महिला कॉफी पी रही है आदि.
इसके बाद इन स्वयंसेवकों के दिमाग को एमआईआर स्कैनर से जोड़ा गया और उसका
सम्पर्क इस कम्प्यूटर सिस्टम से स्थापित किया गया. अब स्वयंसेवकों को
निर्देश दिया गया गया के वे उन फिल्मों को उसी क्रम में याद करें जिस
क्रम में उन्हें वह फिल्में दिखाई गई थी.
एमआईआर स्कैनर ने स्वयंसेवकों के दिमाग के रक्त प्रवाह को नोट किया और
उसके आधार पर कम्प्यूटर सिस्टम ने अनुमान लगाया कि अमुक स्वयंसेवक कौन सी
फिल्म को याद कर रहा है. कम्प्यूटर सिस्टम ने करीब 50% तक जवाब सही दिए
जो मात्र सयोंग से अधिक है.
फिलहाल इस तकनीक को थोड़ा और विकसित करने की आवश्यकता है, परंतु भविष्य मे
टेलिपैथी आधारित कम्प्यूटर सिस्टम आम बात होंगे इसमें कोई संदेह नहीं है.
Thursday, May 2, 2013
"पर्सनल कम्प्यूटर के जनक" क्यों भूला दिए गए?
क्या आप जानते हैं बिल गेट्स कौन है? क्या आप जानते हैं जॉब स्टीव्स कौन
है? आप जरूर जानते होंगे क्योंकि दोनों ही व्यक्ति अपने अपने क्षैत्र में
काफी सफलता अर्जित कर चुके हैं और सुर्खियों में बने रहते हैं. लेकिन कुछ
लोग ऐसे होते हैं जो गुमनामी में रहना पसंद करते हैं और एक दिन दुनिया
उन्हें भूल जाती है. तब यह मायने नहीं रखता कि उन्होनें तकनीक या अन्य
किसी भी क्षैत्र में कितना बड़ा योगदान दिया था.
ऐसे ही एक व्यक्ति थे डॉ. ई. एडवर्ड रोबर्टस. डॉ. रोबर्ट्स आधुनिक निजी
कम्प्यूटर के जनक थे. हाल ही में 68 वर्ष के डॉ. रोबर्ट्स का निधन
न्यूमोनिया की वजह से हुआ. लेकिन बहुत कम तकनीकविदों और इस क्षैत्र से
जुड़े लोगों ने उनको याद किया. एकमात्र बिल गेट्स उनसे मिलने पहुँचे और
उनके आखिरी समय पर वे उनके पास ही थे.
कौन थे डॉ. रोबर्टस?
डॉ. रोबर्ट्स ने आधुनिक कम्प्यूटिंग तकनीक को विकसित करने में महत्वपूर्ण
योगदान दिया था. उस जमाने में बड़े कम्प्यूटर मशीन हुआ करती थी. डॉ.
रोबर्ट्स ने एक माइक्रोकम्प्यूटर बनाने की सोची जिसे कोई भी व्यक्ति
इस्तेमाल कर सके. उन्होनें 70 के दशक के मध्य में MITS Alter नाम का
माइक्रो कम्प्यूटर बनाया जो कम खर्चीला था और उसे विभिन्न कार्य करने के
लिए प्रोग्राम किया जा सकता था. उनकी इस उपलब्धि को कई इतिहासकार पर्सनल
कम्प्यूटर के विकास की पहली कड़ी मानते हैं. कई इतिहासकारों का मानना है
कि उस जमाने का माइक्रोकम्प्यूटर पहला निजी कम्प्यूटर कहा जा सकता है. इस
लिहाज से डो. रोबर्ट्स को यदि निजी कम्प्यूटर का जनक कहा जाए तो गलत नहीं
होगा.
बिल गेट्स और उनके साथी पॉल एलन ने कभी इस इस प्रोजेक्ट पर काम किया था.
बल्कि इन दोनों ने यहीं से अपने कैरियर की शुरूआत भी की थी. बाद में
दोनों ने डॉ. रोबर्ट्स की दुकान पर काम भी किया था. और आगे चलकर अपनी राह
अलग की और माइक्रोसोफ्ट का जन्म हुआ.
डॉ. रोबर्ट्स ने जब माइक्रो कम्प्यूटर बनाया, उस जमाने में इस तरह के
कम्प्यूटर मौज शौख की वस्तु हुआ करते थे और लोगों ने यह समझा ही नहीं था
कि इस डिवाइज का कितना व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है. डॉ. रोबर्ट्स को
भी यह सम्भावना दिखाई नहीं दी. उन्होनें इस क्षैत्र को त्याग दिया और
अपने चिकित्सा के व्यवसाय में लौट गए.
उन्होनें ज्योर्जिया में मेडिकल प्रेक्टिस शुरू की और बाद में तकनीक की
दुनिया से अलग होते चले गए. लोगों ने भी इनको भूलना शुरू कर दिया. इसलिए
जब डॉ. रोबर्ट्स की मृत्यु हुई तब उनके पास उनके परिवार वाले ही थे, और
हाँ बिल गेट्स भी.
है? आप जरूर जानते होंगे क्योंकि दोनों ही व्यक्ति अपने अपने क्षैत्र में
काफी सफलता अर्जित कर चुके हैं और सुर्खियों में बने रहते हैं. लेकिन कुछ
लोग ऐसे होते हैं जो गुमनामी में रहना पसंद करते हैं और एक दिन दुनिया
उन्हें भूल जाती है. तब यह मायने नहीं रखता कि उन्होनें तकनीक या अन्य
किसी भी क्षैत्र में कितना बड़ा योगदान दिया था.
ऐसे ही एक व्यक्ति थे डॉ. ई. एडवर्ड रोबर्टस. डॉ. रोबर्ट्स आधुनिक निजी
कम्प्यूटर के जनक थे. हाल ही में 68 वर्ष के डॉ. रोबर्ट्स का निधन
न्यूमोनिया की वजह से हुआ. लेकिन बहुत कम तकनीकविदों और इस क्षैत्र से
जुड़े लोगों ने उनको याद किया. एकमात्र बिल गेट्स उनसे मिलने पहुँचे और
उनके आखिरी समय पर वे उनके पास ही थे.
कौन थे डॉ. रोबर्टस?
डॉ. रोबर्ट्स ने आधुनिक कम्प्यूटिंग तकनीक को विकसित करने में महत्वपूर्ण
योगदान दिया था. उस जमाने में बड़े कम्प्यूटर मशीन हुआ करती थी. डॉ.
रोबर्ट्स ने एक माइक्रोकम्प्यूटर बनाने की सोची जिसे कोई भी व्यक्ति
इस्तेमाल कर सके. उन्होनें 70 के दशक के मध्य में MITS Alter नाम का
माइक्रो कम्प्यूटर बनाया जो कम खर्चीला था और उसे विभिन्न कार्य करने के
लिए प्रोग्राम किया जा सकता था. उनकी इस उपलब्धि को कई इतिहासकार पर्सनल
कम्प्यूटर के विकास की पहली कड़ी मानते हैं. कई इतिहासकारों का मानना है
कि उस जमाने का माइक्रोकम्प्यूटर पहला निजी कम्प्यूटर कहा जा सकता है. इस
लिहाज से डो. रोबर्ट्स को यदि निजी कम्प्यूटर का जनक कहा जाए तो गलत नहीं
होगा.
बिल गेट्स और उनके साथी पॉल एलन ने कभी इस इस प्रोजेक्ट पर काम किया था.
बल्कि इन दोनों ने यहीं से अपने कैरियर की शुरूआत भी की थी. बाद में
दोनों ने डॉ. रोबर्ट्स की दुकान पर काम भी किया था. और आगे चलकर अपनी राह
अलग की और माइक्रोसोफ्ट का जन्म हुआ.
डॉ. रोबर्ट्स ने जब माइक्रो कम्प्यूटर बनाया, उस जमाने में इस तरह के
कम्प्यूटर मौज शौख की वस्तु हुआ करते थे और लोगों ने यह समझा ही नहीं था
कि इस डिवाइज का कितना व्यापक इस्तेमाल किया जा सकता है. डॉ. रोबर्ट्स को
भी यह सम्भावना दिखाई नहीं दी. उन्होनें इस क्षैत्र को त्याग दिया और
अपने चिकित्सा के व्यवसाय में लौट गए.
उन्होनें ज्योर्जिया में मेडिकल प्रेक्टिस शुरू की और बाद में तकनीक की
दुनिया से अलग होते चले गए. लोगों ने भी इनको भूलना शुरू कर दिया. इसलिए
जब डॉ. रोबर्ट्स की मृत्यु हुई तब उनके पास उनके परिवार वाले ही थे, और
हाँ बिल गेट्स भी.
Wednesday, May 1, 2013
अब मेल में भेजें 10 जीबी की फाइलें
ईमेल में फाइलें सलग्न करनी हो तो उसके आकार को ले कर चिंता बनी रहती है. कहीं 20 एमबी से ज्यादा हुई तो मेल के साथ जुड़ेगी नहीं.
मगर अब गूगल ने अपनी जीमेल सेवा में परिवर्तन करते हुए घोषणा की है कि उसके क्लाउड सेवा गुगल ड्राइव को जीमेल के साथ संगत कर दिया गया है. और इस सेवा के चलते 10 जीबी जितनी बड़ी फाइलें भी आसानी से मेल के साथ भेजी जा सकेगी.
गूगल ड्राइव एक निशुल्क मेघ-भंडारण (क्लाउड स्टोरेज) सेवा है जो प्रयोक्ता को 5 जीबी तक की फाइलें संग्रहित करने की सुविधा देती है. इसके अतिरिक्त 2.5 डालर का शुल्क अदा कर 25 जीबी तक का भंडारण खरीदा भी जा सकता है.
जीमेल के नए प्रारूप का उपयोग कर रहे प्रयोक्ता ही इस सेवा का लाभ उठा सकते है. क्योंकि इस नए प्रारूप में ही गूगल ड्राइव की कड़ी दी गई है.
मेल के साथ फ़ाइल संलग्न करते समय गूगल ड्राइव के बटन को क्लिक कर फाइल चढ़ाएं.अगर चढाई जा रही फाइल प्राप्तकर्ता के साथ साझा नहीं की गई है तो सेटिंग में जाकर साझा करने के लिए कहा जाएगा.
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