प्राइवेट ब्राउज़िंग क्या सचमुच में "प्राइवेट" है?
परंतु क्या सचमुच ऐसा होता है?
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल के हैकर - जो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं - के लिए प्राइवेट ब्राउजिंग प्राइवेट नहीं रही है. कार्निज मेलन विश्वविद्यालय के कोलिन जैक्सन के अनुसार हैकर आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपने कौन सी साइटें खंगाली है, चाहें आप ओपन ब्राउजिंग करें या प्राइवेटॅ.
कोलिन जैक्सन और उनके मित्रों ने स्वयं प्राइवेट ब्राउजिंग की पोल खोलते हुए ब्राउज की गई साइटों की जानकारी निकालने का तरीका विकसित कर लिया है. जैक्सन के अनुसार भले ही आप प्राइवेट ब्राउजिंग मोड में इंटरनेट सर्फ करें परंतु खोली गई वेबसाइटों से सम्बंधित की और आँकडे आपके कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क पर संग्रहित हो ही जाते हैं. भले ही ये ऊपर से ना दिखाई दें परंतु हैकर के लिए उन आँकडों तक पहुँचना बडी बात नहीं होती है.
परंतु क्या हैकरों की दिलचस्पी आपके गुप्त आँकडों में होगी?
ब्रिटेन के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रिक फेरगसन के अनुसार ऐसा हो सकता है परंतु हैकर पहले उन जानकारियों को प्राप्त करना चाहेंगे जो आसानी से उपलब्ध हो. वैसे भी यदि कोई हैकर तकनीकी रूप से इतना सक्षम है कि आपकी गुप्त ब्राउजिंग के आँकड़े निकाल लाए तो उसमे इतनी "प्रतिभा" तो होगी ही कि वह ऐसे स्पायवेर प्रेषित कर दे जो आपके ब्राउजिंग अनुभव को नर्क समान बना दे. उसकी पहली कोशिश यही होगी.
एक सर्वे के अनुसार अधिकतर लोग प्राइवेट ब्राउजिंग का उपयोग पोर्न साइटो को खोलने के लिए करते हैं. वित्तीय लेनदेन और बैंको के खाते सामान्य मोड पर ही किए जाते हैं. इसलिए प्राइवेट ब्राउजिंग के आँकडे अमूमन निरर्थक ही साबित होते हैं. हैकरों की रूचि हाल फिलहाल ऐसे आँकडों को प्राप्त करने में कम होगी. परंतु इस खबर से यह तो पता चलता है कि इंटरनेट पर "एकदम सुरक्षित" कुछ नहीं है.
कुछ तथ्य:
- प्राइवेट ब्राउज़िंग को "पोर्न ब्राउजिंग" के रूप में भी जाना जाता है
- सफारी ने यह सुविधा अप्रैल 29, 2005 को जोड़ी थी
- दिसम्बर 2008 में गूगल ने क्रोम ब्राउजर लॉंच करते समय यह सुविधा भी उपलब्ध करवाई
- 2009 में इंटरनेट एक्स्प्लोरर 8 में यह सुविधा उपलब्ध हुई
- इसी वर्ष फायरफोक्स ने और 2010 में ऑपेरा ने यह सुविधा जोड़ी
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