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Sunday, October 14, 2012

प्राइवेट ब्राउज़िंग क्या सचमुच में "प्राइवेट" है?

प्राइवेट ब्राउज़िंग क्या सचमुच में "प्राइवेट" है?


privacy-browsingएपल के सफारी ब्राउज़र ने इसकी पहल की थी और यह सुविधा इतनी लोकप्रिय हुई की बाकी के ब्राउजरों को आगामी वर्षों में यह सुविधा जोड़नी पड़ी. यह सुविधा है "प्राइवेट ब्राउजिंग". यानी कि एक ऐसे वातावरण या मोड में इंटरनेट ब्राउजिंग करना जिससे कि आपने कौन सी साइट खोली और कौन सा पासवर्ड दिया, इस तरह की कोई भी जानकारी कहीं स्टोर नहीं होती. इसलिए जब आप प्राइवेट ब्राउजिंग विंडो बंद कर देते हैं तो निश्चिंत रह सकते हैं कि आपने अभी अभी ओनलाइन कौन सी साइटें खंगाली यह किसी को पता नहीं चलेगा.

परंतु क्या सचमुच ऐसा होता है?

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल के हैकर - जो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं - के लिए प्राइवेट ब्राउजिंग प्राइवेट नहीं रही है. कार्निज मेलन विश्वविद्यालय के कोलिन जैक्सन के अनुसार हैकर आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपने कौन सी साइटें खंगाली है, चाहें आप ओपन ब्राउजिंग करें या प्राइवेटॅ.

कोलिन जैक्सन और उनके मित्रों ने स्वयं प्राइवेट ब्राउजिंग की पोल खोलते हुए ब्राउज की गई साइटों की जानकारी निकालने का तरीका विकसित कर लिया है. जैक्सन के अनुसार भले ही आप प्राइवेट ब्राउजिंग मोड में इंटरनेट सर्फ करें परंतु खोली गई वेबसाइटों से सम्बंधित की और आँकडे आपके कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क पर संग्रहित हो ही जाते हैं. भले ही ये ऊपर से ना दिखाई दें परंतु हैकर के लिए उन आँकडों तक पहुँचना बडी बात नहीं होती है.

परंतु क्या हैकरों की दिलचस्पी आपके गुप्त आँकडों में होगी?

ब्रिटेन के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रिक फेरगसन के अनुसार ऐसा हो सकता है परंतु हैकर पहले उन जानकारियों को प्राप्त करना चाहेंगे जो आसानी से उपलब्ध हो. वैसे भी यदि कोई हैकर तकनीकी रूप से इतना सक्षम है कि आपकी गुप्त ब्राउजिंग के आँकड़े निकाल लाए तो उसमे इतनी "प्रतिभा" तो होगी ही कि वह ऐसे स्पायवेर प्रेषित कर दे जो आपके ब्राउजिंग अनुभव को नर्क समान बना दे. उसकी पहली कोशिश यही होगी.

एक सर्वे के अनुसार अधिकतर लोग प्राइवेट ब्राउजिंग का उपयोग पोर्न साइटो को खोलने के लिए करते हैं. वित्तीय लेनदेन और बैंको के खाते सामान्य मोड पर ही किए जाते हैं. इसलिए प्राइवेट ब्राउजिंग के आँकडे अमूमन निरर्थक ही साबित होते हैं. हैकरों की रूचि हाल फिलहाल ऐसे आँकडों को प्राप्त करने में कम होगी. परंतु इस खबर से यह तो पता चलता है कि इंटरनेट पर "एकदम सुरक्षित" कुछ नहीं है.

कुछ तथ्य:
  • प्राइवेट ब्राउज़िंग को "पोर्न ब्राउजिंग" के रूप में भी जाना जाता है
  • सफारी ने यह सुविधा अप्रैल 29, 2005 को जोड़ी थी
  • दिसम्बर 2008 में गूगल ने क्रोम ब्राउजर लॉंच करते समय यह सुविधा भी उपलब्ध करवाई
  • 2009 में इंटरनेट एक्स्प्लोरर 8 में यह सुविधा उपलब्ध हुई
  • इसी वर्ष फायरफोक्स ने और 2010 में ऑपेरा ने यह सुविधा जोड़ी 

फेसबुक ने लॉच की "प्लेसेस" सुविधा: बताईए कहाँ हैं आप

फेसबुक ने लॉच की "प्लेसेस" सुविधा: बताईए कहाँ हैं आप


facebook-placesफेसबुक ने आखिरकार अपनी बहुप्रतिक्षित "प्लेसेस" सुविधा को लॉंच कर दिया है.
फेसबुक ने अपने पालो आल्टो स्थित मुख्यालय में पत्रकारों को निमंत्रित किया और अपनी नई सुविधा के बारे में जानकारी दी.

फेसबुक
की नई प्लेसेस सुविधा जियो लोकेशन आधारित है और बताती है कि कोई प्रयोक्ता फिलहाल कहाँ है.

यह सुविधा तीन तरह से काम करती है -
  1. इसकी मदद से आप अपने मित्रों को अपने गंतव्य स्थान के बारे में जानकारी दे सकते हैं. इसके लिए आप स्वयं अपने स्थान की जानकारी चिह्नित कर अपने वांछित मित्रों को टैग कर सकते हैं
  2. इसकी मदद से आप जान सकते हैं कि आपके मित्र कहाँ हैं और आपसे कितनी दूर हैं
  3. इसकी मदद से आप अपने आसपास के स्थानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

फेसबुक यूँ तो इस सुविधा पर कई महिनों से विचार कर रहा था परंतु इस परियोजना से जुड़े एक शीर्ष सोफ्टवेर इंजीनियर के अनुसार इस सुविधा पर मूल कार्य करीब 8 महिने पहले शुरू हुआ था.

इस बारे में जानकारी देते हुए फेसबुक के मार्क जकरबर्ग ने कहा कि हम इस सुविधा को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए प्रयासरत थे और इसके लिए हमने काफी मेहनत की है.

मार्क के अनुसार यह सुविधा फिलहाल वेब और आईफोन अप्लिकेशन के रूप में उपलब्ध होने जा रही है. परंतु फेसबुक इसकी एपीआई भी जारी कर रहा है. यानी थर्ड पार्टी डेवलपर भी अपने तरीके से अप्लिकेशन बना पाएंगे और इस तरह यह सुविधा ब्लैकबेरी और एंड्रोइड आधारित फोनों पर भी उपलब्ध हो जाएगी.

फेसबुक की यह लोकेशन आधारित सुविधा की मदद से प्रयोक्ता विभिन्न स्थलों पर "चैक इन" कर पाएंगे. इसकी एपीआई की मदद से फोरस्कैवर, गोवाला, येल्प और बूया वेबसाइटों के प्रयोक्ता फेसबुक प्लेसेस में चैक इन कर पाएंगे.

मार्क के अनुसार फेसबुक भविष्य में इस सुविधा का वाणिज्यिक उपयोग भी कर पाएगा. इसके लिए विशेष बिजनेस पन्ने बनानी की सुविधा दी जाएगी.

फेसबुक इस सुविधा का वाणिज्यिक इस्तेमाल करने को लेकर कितना गम्भीर है यह इस बात से ही स्पष्ट है कि उसने अभी से विज्ञापन प्रदाताओं से आग्रह करना शुरू कर दिया है कि वे इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए पंजीकरण करें. फेसबुक का इरादा जल्द से जल्द एक बृहद लोकेशन आधारित डायरेक्टरी बनाने का है.
यह किस तरह से काम करेगा?
एक उदाहरण देखिए - आपने अपने शोरूम का स्थान फेसबुक प्लेसेस की मदद से चिह्नित किया है. अब कोई प्रयोक्ता आपके शोरूम में आता है और "चैक इन' करता है. वह अपने मित्रों को टैग करता है और अपने विचार रखता है. ये विचार और वह कहाँ है यह बात उसके मित्रों तक जाती है और वे उसे आगे फैलाते हैं.
इस तरह से आपके शोरूम का ओनलाइन प्रचार होता है. फेसबुक का कहना है कि व्यापारी फेसबुक प्लेसेस की मदद से ठीक उसी तरह से विज्ञापन कर पाएंगे जिस तरह से वे फेसबुक पेज की मदद से करते हैं. यहाँ तक की फेसबुक पेज और फेसबुक प्लेसेस का सम्मिलित रूप लोगों को और भी अधिक आकर्षित करेगा.

जब कोई प्रयोक्ता कहीं चैक इन करता है तो वह कुछ इस तरह से संदेश दे सकता है -
Anniversary Sale!! - at XYZ store, Delhi with Karan Pande and 2 other people

फेसबुक ने अपनी प्लेसेस सुविधा के साथ एक बडी छलांग लगाई है जहाँ उसके पास और उसके प्रयोक्ताओं के पास इसके इस्तेमाल की अपार सम्भावनाएँ हैं. देखना होगा कि लोग इस सुविधा का किस तरह से इस्तेमाल करते हैं.

Official: गूगल ने like.com का अधिग्रहण किया

Official: गूगल ने like.com का अधिग्रहण किया


like-googleजो बात अभी तक गैर अधिकारिक तौर पर कही जा रही थी वह अब अधिकारिक हो गई है. गूगल ने विजुअल शोपिंग सर्च इंजिन like.com का अधिग्रहण कर लिया है. like.com एक भारतीय विजुअल शोपिंग और कीमतों के बीच मूल्यांकन करने वाला सर्च इंजिन है जो प्रयोक्ताओं के द्वारा दिए गए कीवर्ड के हिसाब से ऐसी वस्तुओं की खोज करके देता है जिन्हें ओनलाइन खरीदा जा सकता है.

लाइक.कॉम
के सीईओ मुंजाल शाह ने साइट पर लिखा कि 2006 से लाइक.कॉम ईकोमर्स के क्षैत्र मे अग्रणी रहा है. हम पहले विजुअल सर्च इंजिन थे तो विशेष तौर पर शोपिंग के लिए बनाया गया था. हमने ही सबसे पहले क्रोस मैचिंग की सुविधा दी थी. हम रूके नहीं थे और रूक भी नहीं रहे हैं. गूगल के साथ समझौता होने से हमारा जोश दुगना हो गया है.

like.com एक अन्य फ्रेमवर्क पर आधारित था जो रिया नामक साइट के लिए बनाया गया था. रिया लोगों के चेहरों की पहचान कर उस हिसाब से खोज नतीजे प्रदर्शित करती थी. मुंजाल शाह और उनकी टीम ने इसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे तरीके से किया और सफलता अर्जित की. उन्होने लाइक.क़ॉम नाम विजुअल शोपिंग सर्च इंजिन बनाया जो कि रिया के विचार पर आधारित था परन्तु उसकी वाणिज्यिक क्षमताएँ अधिक थी.

गूगल भी विगत कुछ वर्षों से विजुअल सर्च और चेहरे पहचानने की तकनीक पर काम कर रहा था. 2009 में गूगल ने सिमिलर इमैजेज नामक सुविधा जोडी थी, जो इसी तकनीक पर आधारित थी. परंतु अब लाइक.कॉम का अधिग्रहण करने के बाद उसे इस क्षैत्र में और भी अधिक बढता हासिल होने जा रही है.

इसके लिए गूगल ने अनुमानित तौर पर करीब 100 मिलियन डॉलर चुकाए हैं. इससे लाइक.कॉम को करीब 50 मिलियन डॉलर का लाभ अर्जित हुआ है ऐसी खबरे हैं. दूसरी और मुंजाल शाह और उनकी मुख्य टीम भी लाइक.कॉम के ऊपर काम करती रहेगी.

यूट्यूब से लाखों की कमाई, शीर्ष 10 प्रयोक्ता

यूट्यूब से लाखों की कमाई, शीर्ष 10 प्रयोक्ता


google-youtube-vedioक्या गूगल की प्रसिद्ध वीडियो शेरिंग साइट यूट्यूब से भी कमाई हो सकती है. बिल्कुल. दुनिया के कई लोग इस सेवा की मदद से ना केवल अपने वीडियो अन्य लोगों के साथ साझा कर पाए हैं, बल्कि अच्छी खासी आय भी अर्जित करने में कामयाब हुए हैं.

एक नई शोध के बाद उन शीर्ष 10 लोगों की सूचि जारी की गई है जिन्होनें पिछले वर्ष यूट्यूब पर रखे अपने वीडियो पर आ रहे विज्ञापनों की वजह से सालाना करीब 1

लाख डॉलर यानी की करीब 50 लाख रूपयों से अधिक की कमाई की है. ट्रान के वीडियो पिछले एक वर्ष में करीब 13 करोड 90 लाख बार देखे गए और इससे 1 लाख
डॉलर की कमाई हुई. वैसे ट्रान का चैनल "कम्यूनिटी चैनल' है भी काफी लोकप्रिय. इस चैनल के 7,40,600 से अधिक सबस्क्राइबर हैं.

सिडनी मोर्निंग हेराल्ड की खबर के अनुसार सिडनी की नताली ट्रान ऐसी ही एक प्रयोक्ता हैं जिन्होनें अपने मात्र 10 वीडियो के एक चैनल की मदद से पिछले एक वर्ष के दौरान 1 लाख डॉलर की आय अर्जित की है. यूट्यूब एनालिटिक्स और ट्यूबमोगुलयूज़्ड ने प्रयोक्ताओं के वीडियो को देखे जाने की दर और यूट्यूब के वार्षीक पार्टनर प्रोग्राम के आधार पर यह आँकडे जारी किए हैं. यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम कुछ सबसे लोकप्रिय प्रयोक्ताओं को उनकी क्लिप के नीचे आ रहे विज्ञापनों में से 50% हिस्सा उनको देता है.

इस अभ्यास में जूलाई 2009 से लेकर जूलाई 2010 तक के आँकडों का विश्लेषण किया गया. इस शोध में उन प्रयोक्ताओं को ही शामिल किया गया जो निजी तौर यूट्यूब से जुडे हैं तथा किसी बडे समाचार मीडिया से संबंधित नहीं है.

इस शोध के अनुसार यूट्यूब से सर्वाधिक कमाई करने वाले गैर संस्थानिक व्यक्ति निम्नानुसार हैं -

शेन डॉसन - 3,15,000 डॉलर
द एनोइंग ओरेंज - 2,88,000 डॉलर
फिलिप डेफ्रेंको - 1,81,000 डॉलर
रयान हाइगा - 1,51,000 डॉलर
फ्रेड - 1,46,000 डॉलर
शे कार्ल - 1,40,000 डॉलर
मेडिकोर फिल्मस - 1,16,000 डॉलर
स्मोश - 1,13,000 डॉलर
द यंग तुर्क्स - 1,12,000 डॉलर
नताली ट्रोन - ,1,01,000 डॉलर

जुमो, आ रहा स्वयंसेवी संस्थाओं का अपना सोश्यल नेटवर्क

जुमो, आ रहा स्वयंसेवी संस्थाओं का अपना सोश्यल नेटवर्क


jumoआज फेसबुक है जो लोगों को लोगं से जोड़ता है, अमेज़न का नेटवर्क है जो लोगों को उत्पादों से जोड़ता है, पिंग है जो लोगों को संगीत और संगीत प्रेमियों से जोड़ता है, परंतु लोगों को स्वयंसेवी संस्थाओं से जोड़ने वाला कोई ओनलाइन सोश्यल नेटवर्क नहीं है. इस कमी को दूर करने के लिए जुमो बनाया जा रहा है.

फेसबुक के सह-निर्माता क्रिस ह्यूज़ इस नेटवर्क को बना रहे हैं और उन्होनें इस नेटवर्क के बारे में सोश्यल गुड समिट के दौरान जानकारी दी. क्रिस ह्यूज़ ने जुमो का प्रदर्शन तो नहीं किया परंतु जुमो के क्रियाकलाप के बारे में महत्वपूर्ण बातें बताई.

मेशेबल.कॉम की खबर के अनुसार क्रिस ह्यूज ने जनवरी 12, 2010 के दौरान हैती में आए विनाशक भूकम्प से अपनी बात शुरू की. इस भूकम्प ने लाखों लोगों की जिंदगियों को तबाह कर दिया. असंख्य लोग मारे गए और जो बच गए उनके पास ना तो खाना बचा ना ही कोई काम. परंतु जो एक अच्छी बात देखने में आई वह यह कि लोग हैती की मदद करने के लिए दौड़ पड़े.

इस दौड में महत्वपूर्ण पात्र इंटरनेट ने भी निभाया. उस दिन के बाद से 75000 से अधिक इस घटना से संबंधित समाचार बुलेटिन ओनलाइन स्ट्रीम हुए. हैती के लोगों के लिए 1.3 बिलियन डॉलर की सहायता राशि जमा हो गई. इस घटना ने साबित किया कि लोग एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं. इस घटना ने यह भी साबित किया कि त्रासदी चाहे एक ही प्रकार की हो परंतु जहाँ गरीबी होती है वहाँ अधिक जानहानि होती है.

यहाँ जरूरत आन पड़ती है लोगों का जीवनस्तर सुधारने की, ताकी गरीबी कम हो और इस तरह की विपदाओं से सही तरीके से निपटने के लिए कोई रूपरेखा तैयार हो. इसके लिए दुनिया भर की हजारों संस्थाएँ काम कर रही है. अब जरूरत है लोगों को उनके साथ जोड़ने की और यह काम जुमो करेगा.

क्या होगा जुमो में?
जुमो में तीन मुख्य विभाग होंगे - ढूंढो [Find], फोलो करो [Follow] और सहायता दो [Support]. पहले विभाग के माध्यम से जुमो आपकी रूचि और उद्देश्य के अनुसार उससे मिलता जुलता काम कर रही संस्थाओं की सूचि आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा. आप चाहें तो उनमें से किसी संस्था को फोलो कर पाएंगे. दूसरे विभाग में जुमो आपके द्वारा फोलो की जा रही संस्थाओं की स्ट्रीम आप तक प्रस्तुत करेगी जिससे आप जान पाएंगे कि वह संस्था फिलहाल क्या काम कर रही है. और तीसरे विभाग के माध्यम से आप उनमें से किसी संस्था को सहायता राशि पहुँचा पाएंगे.

एक विशेषता यह है कि इसके लिए आपको बार बार जुमो पर आने की आवश्यकता नहीं होगी. आप यह स्ट्रीम ईमेल अथवा फेसबुक पर भी प्राप्त कर पाएंगे.

सेवाभावी लोगों को आपस में जोडने का यह एक अच्छा प्रयास है. जुमो इस वर्ष के अंत तक लॉंच हो सकता है.

"SEX" की कीमत करोड़ों में; डुमेन के लिए भारी भरकम बोली

"SEX" की कीमत करोड़ों में; डुमेन के लिए भारी भरकम बोली


sexdotcomआज यदि आप अपनी कम्पनी के लिए अथवा व्यक्तिगत कार्यों के लिए किसी वेब डुमेन को पंजीकृत करना चाहेंगे तो पाएंगे कि वह तो किसी और के पास है. आज अपना वांछित डुमेन नेम खरीद पाना बेहद मुश्किल हो गया है. ऐसे में यदि "sex.com" बिकता है तो यह चर्चा का विषय बन जाता है.

खबर है कि sex.com डुमेन जिसके पास है वह कम्पनी इसे करीब
1.3 करोड़ डॉलर यानी कि करीब 65 करोड़ रूपयों में बेचने जा रही है. फिलहाल यह डुमेन Escom नामक कम्पनी के पास है. इस कम्पनी ने 2006 में यह डुमेन 1.2 करोड डॉलर में खरीदा था. इस तरह से देखा जाए तो विगत चार वर्षों में इसकी कीमत कुछ खास नहीं बढी है, फिर भी 65 करोड़ रूपए में एक डुमेन का बिकना बड़ी बात जरूर कही जा सकती है.

इस डुमेन के लिए 12 कम्पनियों ने बोली लगाई थी और अंत में क्लोवर होल्डिंग्स नामक कम्पनी ने इस डुमेन के लिए सबसे बड़ी बोली लगाकर इसे खरीद लिया है ऐसी खबर है.

हालाँकि इस डुमेन के लिए प्राणियों की सहायतार्थ कार्य करने वाली संस्था पेटा ने भी कोशिश की थी. पेटा ने कहा था कि sex.com उसे दान में मिलना चाहिए. वह इसका उपयोग अपने एक कैम्पेन के लिए करती जिसके तहत बताया जाता कि शाकाहारी लोग भी सेक्सी होते हैं. लेकिन तब एस्कोम ने पेटा को यह डुमेन देने से इंकार कर दिया था.

अब यह डुमेन क्लोवर होल्डिंग्स के पास है और देखना होगा कि अब डुमेन मात्र क्रय-विक्रय का माध्यम बनता है या फिर ओनलाइन भी होता है.

5 सोश्यल नेटवर्किंग साइटें जो आपके बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है

5 सोश्यल नेटवर्किंग साइटें जो आपके बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है


kid-internetआज ओनलाइन सोशयल नेटवर्किंग का जमाना है. बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक हर किसी की फेसबुक प्रोफाइल तो होती ही है. आज प्रत्यक्ष सवाँद की जगह "स्टेटस अपडेट " ले रहा है. ऐसे में जाहिर है कई सारी नई / पुरानी साइटे तरह तरह के तरीकों से प्रयोक्ताओं को आकर्षित करने का प्रयास करती है. ऐसे में कुछ साइटें बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

फोक्स न्यूज़ की एक खबर के अनुसार साइबर विशेषज्ञों 5 ऐसी साइटों को चिह्नित किया है जो बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय है परंतु सुरक्षित नहीं है.

Txtspoof.com:
यह अपेक्षाकृत एक नई साइट है जो किशोरों और युवाओं के लिए ही बनाई गई है. इस साइट की मदद से कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल पर संदेश भेज सकता है. संदेश प्राप्त करने वाले को लगता है कि वह संदेश किसी अन्य के नम्बर से आया है. किशोर इस साइट का उपयोग मन की भड़ास निकालने और "आनंद' के लिए करते हैं. परंतु यह सुरक्षित नहीं है.

Juicycampus:
यह बड़ी उम्र के विद्यार्थियों के लिए बनी साइट है. यह साइट कॉलेज के और स्कूल के विद्यार्थियों को ध्यान में रख कर बनाई गई है. यहाँ छात्र कई प्रकार के समूह और लिस्ट बना सकते हैं. परंतु यहाँ कई सारी ऐसी लिस्टें बनी हुई है जो अशोभनीय कही जा सकती है, जैसे कि - सबसे मुर्ख छात्र, सबसे सेक्सी छात्राएँ, सबसे खराब अध्यापक आदि. कुल मिलाकर बच्चों के लिए हानिकारक साइट.
[अपडेट : यह साइट अब बंद कर दी गई है.]

Chatroulette:
इस साइट की मदद से दुनिया भर से लोग एक दूसरे के साथ वीडियो चैटिंग कर सकते हैं. कोई भी व्यक्ति किसी भी अन्य व्यक्ति को चुन सकता है, बिना किसी जान पहचान के. इस साइट पर कई ऐसे क्लोन चैट क्लाइंट है जहाँ से "साइबर बुलिंग" की जाती है. यह साइट वयस्कों के लिए ठीक हो सकती है परंतु बच्चों के लिए नहीं.

Formspring:
इस साइट के माध्यम से छात्र एक दूसरे को प्रश्न पूछ सकते हैं. यह साइट ऊपरी तौर पर काफी उपयोगी लगती है, परंतु यहाँ निजता की गोपनीयता भंग होती रहती है. दूसरी तरफ यहाँ बच्चे काफी आसानी से अपनी पहचान छूपा सकते हैं. इस तरह से वे 'ओछे" और अश्लील प्रश्न भी पूछते हैं. इस साइट का उपयोगी किसी दूसरे की भावनाओं को आहत करने के लिए भी होता है. इसलिए यह साइट भी बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं.

Facebook:
जी हाँ, फेसबुक भी. फेसबुक पर अकाउंट खोलने के लिए आपका 13 वर्ष की उम्र का होना आवश्यक है, परंतु आम तौर पर बच्चे अपने जन्म का वर्ष गलत बताकर प्रयोक्ता अकाउंट आसानी से पा लेते हैं. इसके बाद वे अपनी गोपनीय जानकारियाँ और तस्वीरें प्रकाशित करने लग जाते हैं. यहाँ जरूरत है कि अभिभावक अपने बच्चों की ओनलाइन गतिविधियों पर कड़ाई से नजर रखे.

क्या ईमेलों की बाढ तनाव पैदा करती है?

क्या ईमेलों की बाढ तनाव पैदा करती है?


emailक्या जब आप अपने ऑफिस का कम्प्यूटर शुरू करते हैं तो सबसे पहले अपना इनबॉक्स देखते हैं? क्या ऐसा होता है कि सुबह सुबह ईमेलों के ढेर से भरे हुए इनबॉक्स को देखते ही आप तनावग्रस्त महसूस करने लगते हैं?

आईबीएम के द्वारा करवाए गए एक सर्वे के अनुसार कार्यस्थलों पर ईमेल का ढेर लग जाने पर इंसान को तनाव महसूस होने लगता है. आईबीएम ने 629 मैनेजरों का सर्वे किया और इसके नतीजे कुछ इस प्रकार से हैं -

  • 45% मैनेजरों ने माना कि ढेर सारे ईमेल देखकर उन्हें तनाव महसूस होता है
  • 7% के लिए यह अत्यधिक तनाव भरा पल होता है
  • 50% लोग मानते हैं कि जवाब देने को बाकी, ऐसे ईमेल उनके तनाव को बढाते रहते हैं
  • 48% लोग मानते हैं कि लगातार जवाब देना पडे ऐसे ईमेल उन्हें तनाव देते हैं
  • 100% लोग मानते हैं कि ईमेल उनके लिए सम्पर्क में रहने का सबसे बढिया माध्यम है परन्तु वह तनाव देता है
यही नहीं ईमेल का ढेर लग जाने से गलतियाँ भी होती है. और कभी कभी ये गलतियाँ इतनी बडी होती हैं कि इससे तनाव कई गुना बढ जाता है. उदाहरण के लिए आप किसी ऐसे व्यक्ति को ईमेल भेज देते हैं जिसे भेजना नहीं था या फिर किसी एक व्यक्ति के लिए लिखे गए मेल को सभी लोगों को भेज देते हैं.
  • 33% लोग मानते हैं कि उन्होनें गलत आदमी को मेल भेजा और उससे उन्हें भारी मानसिक तनाव का अनुभव हुआ
  • 50% कर्मचारी मानते हैं कि उन्होनें रिप्लाय की जगह रिप्लाय ऑल दबा दिया
  • 59% मैनेजरों ने माना कि उन्होनें मेल भेजने के बाद उसे रोकना चाहा परंतु सफलता नहीं मिली
  • 49% कर्मचारियों ने माना कि उन्होनें मेल भेजने के बाद महसूस किया कि उन्हें यह नहीं लिखना चाहिए था
ईमेल आज ऑफिस की जरूरत है, परंतु इसका सही तरीके से इस्तेमाल ना करने की वजह से अनावश्यक रूप से तनाव बढ जाता है.

नया वेब ब्राउज़र रोकमेल्ट, जो दुनिया को जोड़े आपकी दुनिया से

नया वेब ब्राउज़र रोकमेल्ट, जो दुनिया को जोड़े आपकी दुनिया से


rockmeltयही कहना है इस नए वेब ब्राउज़र के डेवलपरों का. रोकमेल्ट एक नया वेब ब्राउजर है जो आपकी दुनिया को वेब दुनिया से जोडता है.

नेटस्केप के संस्थापक
मार्क पीटरसीन और उनकी टीम के द्वारा विकसित इस वेब ब्राउजर का उपयोग करने के लिए आपको अपने फेसबुक खाते मे लोगिन होना पडता है. इससे आपके मित्रों की सूचि आपको दिखाई देने लगती है.

आप अपनी ब्राउज़िंग हिस्ट्री को अपने मित्रों के साथ साझा कर पाते हैं और इस तरह से आपकी ब्राउजिंग आपके मित्रों के लिए खुली किताब की तरह हो जाती है.

9.9 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ गूगल के क्रोमियम सोफ्टवेर पर आधारित होने की वजह से आपको इस ब्राउजर का लूक गूगल क्रोम जैसा ही दिखाई देगा परंतु इसमें कुछ ऐसी सुविधाएँ हैं जो क्रोम मे नही है. रोकमेल्ट का इस्तेमाल कर आप तस्वीरें, वेब कडियाँ, वीडियो तथा अन्य जानकारियाँ अपने मित्रों के साथ त्वरितता से साझा कर पाते हैं. इसके अलावा इसकी खोज सुविधा भी बेहतर है.

किसी भी विषय पर आधारित खोज करने पर आपको अनगिनत कडियों की अपेक्षा मात्र 10 नतीजे प्रति पन्ना दिखाई देते हैं वह भी उस साइट की थम्बनैल के साथ. इससे आपको वांछित साइट चुनने में आसानी रहती है. और क्रोमियम सोफ्टवेर पर आधारित होने से यह ब्राउजर तेज भी है.

परंतु चुँकि आपको ब्राउजिंग करने से पहले लोगिन होना पडता है, तो आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री रोकमेल्ट तक पहुँच जाती है. इससे आपकी ब्राउजिंग गोपनीय नही रह पाती. परंतु रोकमेल्ट के अधिकारियों का कहना है कि वे प्रयोक्ताओं की जानकारियाँ विज्ञापनप्रदाताओं को नहीं बेचेंगे. उनका कहना है कि चुँकि उन्हें एड नेटवर्क स्थापित करने में दिलचस्पी नही है इसलिए उन्हें इसमें भी दिलचस्पी नही है कि आप क्या ब्राउज कर रहे हैं.

परंतु फिर भी गोपनीयता भंग होने का खतरा तो बना रहता है. इस वेब ब्राउजर का उपयोग करना चाहें तो इसकी कडी यह है.

7 बातें जो सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर नहीं लिखनी चाहिए

7 बातें जो सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर नहीं लिखनी चाहिए


facebook-privacyक्या आप फेसबुक, ओर्कुट और मायस्पेस जैसी सोश्यल नेटवर्किंग साइटों को एक खुली किताब की तरह मानते हैं? क्या आपको लगता है कि आपके द्वारा पोस्ट की गई हर जानकारी मात्र आपके मित्रों तक ही पहुँच रही है? तो एक बार फिर सोचिए.

सोश्यल नेटवर्किंग साइटें "गुप्त" नहीं होती है. ये खुली किताब की तरह हो सकती है परंतु उनके लिए जो लोगों की जानकारियाँ चुराना चाहते हैं.

सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर अपनी प्रोफाइल बनाते समय अत्यंत निजी जानकारियों को गुप्त ही रखना हितावह होता है. एक साइबर विशेषज्ञ डेव वाईटलेग ने फेसबुक पर पोस्ट ना करने जैसी 10 जानकारियों के बारे में लिखा है. उनमें से हमने चुनी ऐसी 7 जानकारियाँ जो वाकई में गुप्त रखी जानी चाहिए.

जन्मस्थान और जन्मतिथि - फेसबुक तथा अन्य सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर प्रोफाइल बनाते समय यह जानकारी नहीं लिखनी चाहिए. क्योंकि अमूमन हम ईमेल खातों को बनाते समय गुप्त प्रश्न के जवाब में अपना जन्मस्थान ही चुनते हैं. इस तरह से अपने जन्मस्थान की जानकारी सार्वजनिक कर देने से आप ओनलाइन चोरी का शिकार हो सकते हैं.

अपनी माँ का नाम - अपनी परिवार के सदस्यों की जानकारी हो सके तो ना भरें. विशेष रूप से माँ का नाम, क्योंकि ईमेल खातों तथा अन्य स्थानों पर गुप्त प्रश्न बनाते समय जो एक सवाल आपसे पूछा जाता है वह यह भी होता है.

अपना पता - अपना वास्तविक पता सार्वजनिक ना करें. क्योंकि आप नहीं जानते कि कौन आपकी जानकारियाँ पढ रहा है.

निजी तस्वीरें पोस्ट ना करें - अपने बच्चों की तथा अपने परिवार के निजी कार्यक्रमों की तस्वीरें पोस्ट ना करें (फेसबुक जैसी साइट पर आप अपने एल्बम को मात्र मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं). हितावह यह है कि आप पिकासा या फ्लिकर जैसी साइटों पर तस्वीरें अपलोड करें जहाँ आप अपने फोल्डर को "प्राइवेट" रख सकते हैं (हालाँकि यह भी एकदम सुरक्षित तो नहीं है).

अपनी छुट्टी की जानकारी - फेसबुक जैसी साइट पर आप छुट्टियों में कितने दिन शहर से बाहर जा रहे हैं और इस बीच घर पर कोई होगा कि नहीं यह जानकारी सार्वजनिक ना करें.

अभद्र भाषा - सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर किसी पर भी आरोप ना लगाएँ, अभद्र भाषा का उपयोग ना करें और मजाक में ही सही परंतु अपने किसी भी मित्र की तस्वीर पोस्ट ना करें. यह सब कानूनी रूप से आप के खिलाफ जा सकता है.

स्विकारोक्ति - किसी बात को लेकर ग्लानी का अनुभव कर रहे हैं और लोगों के सामने उसे कबूल करना चाहते हैं? सोश्यल नेटवर्किंग साइटें वह स्थान नहीं है. अपनी निजी बातों को इस तरह की साइटों पर ना लिखें.

ये कुछ ऐसी बातें हैं जो आम तौर पर हमारे ध्यान से बाहर चली जाती है और इससे हमारी गोपनियता भंग हो सकती है. ध्यान रखिए सोश्यल नेटवर्किंग साइटें अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों के साथ सम्पर्क में रहने का अच्छा माध्यम है. परंतु वह गुप्त नही है.

यूट्यूब की नई सर्च सुविधा से वीडियो ढूंढना होगा आसान

यूट्यूब की नई सर्च सुविधा से वीडियो ढूंढना होगा आसान


youtube-newsयूट्यूब, जो कि दुनिया की सबसे लोकप्रिय वीडियो शेरिंग साइट है, ने अपनी खोज प्रक्रिया में थोडा बदलाव किया है. यूट्यूब ने एक नया टूल लॉंच किया है जो प्रयोक्ताओं के लिए वीडियो ढूंढना आसान बना देता है. इस नए टूल का नाम है टोपिक्स.

इस बारे में यूट्यूब के सर्च इंजीनियर पलाश नंदी का कहना है कि लोग यूट्यूब पर आते हैं परंतु उन्हें पता नहीं होता कि उन्हे क्या खोजना है क्योंकि उन्हें नहीं पता कि यूट्यूब पर कौन कौन से वीडियो हैं. पलाश के अनुसार यूट्यूब आज वीडियो का पिटारा है जहाँ हर विषय पर आधारित अनगिनत वीडियो मौजूद हैं, बस उन्हें ठीक ढंग से खोजे जाने की जरूरत है.

इसमें एक दिक्कत यह आती है कि प्रयोक्ता को ज्ञात नहीं होता कि उसे अगर "हास्यास्पद वीडियो" देखने हैं तो उसे किन कीवर्डों का सहारा लेना चाहिए और किसी अन्य विषय पर आधारित वीडियो देखने हैं तो किन कीवर्डों का. दूसरी दिक्कत तब आती है जब प्रयोक्ता अपना वीडियो अपलोड करते हैं. कुछ प्रयोक्ता अपने वीडियो का शीर्षक वीडियो के विषय से इतर लिखते हैं. वे कीवर्डों की तरफ ध्यान नहीं देते. इससे उन वीडियो को खोजा जाना मुश्किल हो जाता है.

अब यूट्यूब ने जो नया टूल लॉंच किया है वह इन सब बाधाओं को दूर करता है. यह टूल किसी भी वीडियो पर आ रही टिप्पणियों पर भी गौर करता है और देखता है कि प्रयोक्ताओं ने टिप्पणी देते समय किन शब्दों का इस्तेमाल किया. इसके बाद इसका अलगोरिथम एक विषयाधारित सूचि बना लेता है. इसके बाद प्रयोक्ता जब इस टूल की मदद से खोज करते हैं तो उन्हें एक बडी वीडियो लाइब्रेरी ब्राउज करने के लिए मिल जाती है.

यूट्यूब को उम्मीद है कि इस टूल की मदद से प्रयोक्ताओं के द्वारा साइट पर बिताए जाने वाले समय में बढोत्तरी होगी.

ओनलाइन शोपिंग या बुकिंग करने से पहले यह पढें


online-adरेलवे की टिकट से लेकर फिल्म की टिकट और महंगे सामान भी. आजकल हम ओनलाइन शोपिंग को अधिक से अधिक महत्व देते हैं और हमारी क्रेडिट कार्ड और ओनलाइन बैंक ट्रांसफर जानकारी हमारे वेब ब्राउजर में टाइप की जाती है. परंतु हम यह नहीं जान पाते कि क्या वह जानकारी किसी अन्य अवांछित जगह पर भी पहुँच रही है.

एक ओनलाइन सुरक्षा अधिकारी कैरेन मैकडोवल ओनलाइन फिशिंग, वोर्म्स और वायरस प्रतिरक्षा के विशेषज्ञ माने जाते हैं. उनके अनुसार ओनलाइन शोपिंग करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए -

  • अपने ईमेल आईडी को अवांछित जगहों पर ना लिखें. चाहें तो इसके लिए एक विशेष ईमेल आईडी बना लें जिसका कोई खास उपयोग ना होता हो.
  • अपनी निजी जानकारियों को जब तक हो सके अपने तक ही सीमित रखें.
  • अपने हार्डवेर और सोफ्टवेर को अपडेट करते रहें.
  • सोश्यल नेटवर्किंग साइटों तथा अन्य जगहों पर प्रयुक्त छोटे यूआरएल पर क्लिक करने से बचें.
इसके अलावा कुछ अन्य उपाय भी हैं जिनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जैसे कि -
  • ओनलाइन ट्रांसेक्शन हमेशा प्राइवेसी मोड में करें
  • बैंक खाते में लोगिन करते समय पासवर्ड टाइप करने की जगह वर्चुअल कीबोर्ड का इस्तेमाल करें
  • यदि आपके पास दो-तीन क्रेडिट कार्ड है तो उस क्रेडिट का उपयोग अधिक करें जिसमें कम क्रेडिट बैलेंस हो
  • अपने सीवीवी पासवर्ड को गुप्त रखें और अपने परिवार के सदस्यों, जन्मतिथि आदि का उपयोग पासवर्ड बनाते समय ना करें
  • सम्भव हो तो अपने पासवर्ड को प्रति माह बदलते रहें

पाथ, सोश्यल नेटवर्क नहीं यह है पर्सनल नेटवर्क

पाथ, सोश्यल नेटवर्क नहीं यह है पर्सनल नेटवर्क


pathसोश्यल नेटवर्किंग साइटें तो कई हैं, परंतु यह एक ऐसी साइट है जो आपको अपना पर्सनल यानी कि व्यक्तिगत नेटवर्क बनाने की सुविधा देती है जिनके साथ आप तस्वीरें तथा अन्य जानकारियाँ साझा कर पाते हैं.

यह है पाथ, और इस नई नेटवर्किंग साइट को तैयार किया है फेसबुक के पूर्व इंजीनियर डेव मोरिन ने. डेव ने फेसबुक कनेक्ट और फेसबुक प्लेटफार्म विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उसके बाद उन्होनें फेसबुक छोड़ दी थी और अपनी कम्पनी खडी की. उनका लक्ष्य था एक ऐसा नेटवर्क बनाना जिसे प्रयोक्ता 'निजी' कह सकें. और सोमवार को उस नेटवर्क को लॉंच किया गया.

पाथ की विशेषता यह है कि यहाँ आप 50 से अधिक मित्र नहीं बना सकते. इसे एक कमी के रूप में चिह्नित कर सकते हैं परंतु यही इसकी खूबी है. फेसबुक जैसी साइटों पर आप 500-600 मित्र बनाकर खुश तो हो सकते हैं, परंतु जब कोई निजी जानकारी साझा करने बात आती है तब मुश्किल खडी हो जाती है. आप यह नहीं चाहते कि अमुक तस्वीर आपके सारे मित्र देखें (जिनमे से कई को आपने यूँ ही जोड़ लिया है और जिनके बारे में आप जानते तक नहीं). ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे?

पाथ उसका जवाब है. यहाँ आप मात्र 50 मित्रों के साथ तस्वीरें साझा करेंगे. और ये मित्र वही होंगे जो आपके करीब होंगे. एक शोध रिपोर्ट के अनुसार हम जीवन में 40 से लेकर 60 व्यक्तियों को अपने नजदीकी रिश्तेदार या घनिष्ट मित्र के रूप में पा सकते हैं. पाथ, का निर्माण इसी तर्ज पर हुआ है.

इस साइट का फिलहाल आईफोन संस्करण लॉंच किया गया है. आप आईफोन में मौजूद तस्वीर को अपने पाथ नेटवर्क के साथ साझा कर पाते हैं. यहाँ भी आप चाहें तो किसी तस्वीर को एक दम करीबी लोगों से ही साझा कर पाते हैं. यानी कि जिन लोगों को आप तस्वीर में टैग करेंगे केवल उन्हें ही वह तस्वीर दिखाई देगी.

मोरिन का कहना है कि यह फेसबुक की प्रतिस्पर्धी साइट नहीं है. बल्कि यह एक नई साइट है जिसे फेसबुक प्रयोक्ता भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

आ गया "जीमेल कीलर" फेसबुक मेल

आ गया "जीमेल कीलर" फेसबुक मेल

facebook-emailफेसबुक इस तकनीक को विकसित करने के लिए पिछले एक वर्ष से मेहनत कर रहा था. कुछ जानकार इसे जीमेल कीलर की संज्ञा दे रहे हैं, यानी कि एक ऐसी तकनीक जो जीमेल तथा अन्य समकक्ष ईमेल क्लाइंट तकनीकों की नींद उड़ाने वाली है.

फेसबुक
दुनिया की सबसे लोकप्रिय सोश्यल नेटवर्किंग सेवा तो है ही, परंतु अब वह अपना विस्तार तेजी से बढा रही है. अब फेसबुक ने अपने 50 करोड़ प्रयोक्ताओं के लिए नए मैसेजिंग सिस्टम को लॉंच किया है. फेसबुक का मानना है कि यह नया सिस्टम इतना ताकतवर है कि सामान्य ईमेल अब बीते जमाने की बात हो जाएगी.

क्या है यह नया सिस्टम:
फेसबुक का नया मैसेजिंग सिस्टम दरअसल ईमेल, व्यक्तिगत संदेश और चैट का मिलाजुला स्वरूप है. यह कुछ कुछ उसी तरह से काम करता है जिस तरह से फेसबुक का पुराना व्यक्तिगत संदेश सिस्टम काम करता था.

अब फेसबुक के प्रयोक्ता अपना ईमेल एड्रेस प्राप्त कर पाएंगे. उदाहरण के लिए यदि किसी का फेसबुक नाम Gopal है तो उसको यह ईमेल पता मिलेगा - gopal@facebook.com .

क्या है नया?
आम ईमेल क्लाइंट की बजाय यह तकनीक कई मायनों में अलग है. उदाहरण के लिए यहाँ ईमेल, चैट और फेसबुक स्टेटस तीनों का मिश्रण एक ही फीड में दिखाई देता है. और प्रयोक्ता चाहे जिस तरह से जवाब दे सकते हैं. उदाहरण के लिए यदि किसी मित्र ने चैट संदेश डाला, तो आप उसको ईमेल मार्फत जवाब दे सकते हैं.

जब कोई मित्र आपको टेक्स्ट संदेश भेजता है तो वह आपके इनबॉक्स में तो आता है परंतु साथ ही आपको फेसबुक पन्ने पर भी दिख जाता है. इससे आप उसे तुरंत जवाब दे पाते हैं. यदि संदेश निजी और गोपनीय हो तो आपका मित्र उसे ईमेल के स्वरूप में प्रेषित करेगा और आप उसे अपने इनबॉक्स में जाकर पढ पाएंगे.

इससे क्या लाभ होगा?
इससे ईमेल सिस्टम काफी तेज हो जाएगा. कोई ऐसी बात हो जो सार्वजनिक होने से गोपनीयता को भंग ना करती हो तो आप सीधे टेक्स्ट संदेश भेज सकते हैं. गोपनीय बातों को ईमेल स्वरूप में भेज सकते हैं और चाहें तो चैट ही कर सकते हैं. परंतु आपकी बातचीत की सारी फीड एक ही स्थान पर रहती है.

दूसरा लाभ यह है कि इससे स्पामिंग पर लगाम लग जाती है. इस सिस्टम के द्वारा स्पामिंग करना कठीन है और उसकी फिल्टरिंग भी आसान है.

फेसबुक के प्रमुख मार्क जकरबर्ग के अनुसार ईमेल सिस्टम एक धीमा माध्यम है. फेसबुक का यह नया मैसेजिंग सिस्टम तेज है और कारगर है. हालाँकि इसमें भी ईमेल की सुविधा तो है, परंतु मार्क जोर देकर कहते हैं कि यह मात्र ईमेल सिस्टम नही है, उससे आगे की तकनीक है.

अब देखना यह होगा कि फेसबुक की चीर प्रतिद्वंदी गूगल इसका जवाब देता है.

Saturday, October 13, 2012

अब प्रीपेड होगी ऑनलाइन टिकट बुकिंग


नई दिल्ली। इंटरनेट से रेलवे टिकट बुकिंग कराने वालों के लिए एक खुशखबरी है। आने वाले दो महीनों में यात्रियों अपनी टिकट की पेमेंट करने के लिए बैंक की वेबसाइट पर जाकर नेट बैंकिंग की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। बल्कि अब यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर टिकट बुक कराएंगे तो उनकी तरफ से पहले से ही जमा कराई गई रकम में से टिकट का अमाउंट कट जाएगा। इससे टिकट बुकिंग में लगने वाला वक्त बचेगा और टिकट जल्दी बुक हो जाएगी। यह स्कीम अगले दो महीने में चालू हो जाएगी।
आईआरसीटीसी [इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिजम कॉरपोरेशन] के प्रवक्ता ने बताया कि इसके लिए जल्द ही रोलिंग डिपॉजिट स्कीम [आरडीएस] शुरू की जाएगी। पहले की तरह टिकट बुकिंग के लिए नेट बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तो किया ही जाएगा,लेकिन जो लोग आरडीएस लेना चाहेंगे, उन्हें यह सेवा मुहैया कराई जाएगी।
गौरतलब है कि फिलहाल ट्रेन टिकट बुक कराने के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर पहले यात्री संबंधित जानकारी दर्ज करानी पड़ती है। इसके बाद नेट बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड के जरिए पेमेंट करने का नियम है। इसमें कई बार इतना वक्त लग जाता है कि वेटिंग लिस्ट काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा, कई बार अमाउंट डेबिट होने से पहले आईआरसीटीसी का लॉगिन ही बंद हो जाता है जिससे अमाउंट तो कट जाते हैं लेकिन टिकट बुक नहीं हो पाती।
आरडीएस के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। आरडीएस अकाउंट में कम से कम डेढ़ से दो हजार रुपए जमा करवाने का प्रस्ताव है जो नेट बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड के जरिए जमा कराया जा सकेगा। इस स्कीम में रजिस्ट्रेशन फीस दो सौ से ढाई सौ रुपये का होगा जो टिकट बुकिंग के लिए अकाउंट में क्रेडिट हो जाएगा। अगर कोई आरडीएस अकाउंट बंद कराना चाहेगा तो उसका पैसा वापस बैंक अकाउंट में चला जाएगा। इस सिस्टम में आने के लिए यात्री को अपना पैन कार्ड नंबर देना होगा, जिससे उसका वेरिफिकेशन हो सके जिसके बाद उसे एक पासवर्ड और पिन नंबर दिया जाएगा। इसी पिन और पासवर्ड के जरिए वह भविष्य में ट्राजैक्शन कर सकेगा।

Thursday, October 11, 2012

अब आपका टीवी भी बन सकता है Smart



अब आपका टीवी भी बन सकता है Smart

आप भी नए जमाने के स्मार्ट टीवी के विज्ञापन देख कर अपने बुद्धू बक्से  से उदासीन हो गए हैं तो एक मौका है आपके पास अपने पुराने टीवी को भी स्मार्ट बनाने का .



या फिर दुसरे नजरिये से देखें की अगर आप टैबलेट खरीदने की सोच रहें हैं तो टैबलेट की सारी  खूबियाँ आपके टीवी में ही उपलब्ध हो सकती हैं .

इसके  लिए आपको अपने टीवी से जोड़ना होगा Akai  का Smart Box .
ये डी टी एच रिसीवर की तरह का एक छोटा सा बॉक्स है जो आपको इन्टरनेट सर्फिंग और एंड्रोइड की सुविधा आपके टीवी पर ही उपलब्ध करता है .
इसमें आप ब्रोडबैण्ड  या वाई फाई या फिर नेट सेटर  की मदद से इन्टरनेट का उपयोग कर पायेंगे .

इसका उपयोग आप अपने पुराने या नए किसी भी तरह के टीवी के साथ कर सकते हैं चाहे वो CRT हो या  LED, LCD .

आइये देखते हैं इसका तकनीकी पक्ष -


CPU        ARM Cortex A8 , 1.2GHz
RAM        1GB DDR3
Image Processing        Open GL 3D
Program Memory        4GB NAND FLASH
Media Player        Full HD 1080P@60Hz
OS Version        Android OS 2.3
A/V Out        HDMI 1.3 Interface CVBS
Card reader        SD/SDHC , Max Support upto 32GB
USB Ports        4xUSB2.0 Ports
Wired Network        RJ-45 LAN 10/100 Mbps
Wireless Network        IEEE 802.11b/g/n
Video Resolution        1920x1080p@ 60fps
Video Formats        DAT, MPG, VOB, TS, AVI, MKV, MP4, MOV,3GP,RM, FLV, WEBM
Video Codec        MPEG-1/2, MPEG-4, DIVX, Real Media, H.264, H.263, Google VP8
Audio Formats        MP1, MP2, MP3, WMA, WAV, APE, OGG, OGA, FLAC, AAC
Audio Codec        MPEG, WMA, WAV, APE, OGG, FLAC, AAC, DTS, AC3
Document Support        PDF, PPT, DOC & XLS
Image Formats        JPEG, BMP, GIF, PNG & JPG
Subtitle        SRT
Power        DC 5V 2A


अब एक नजर इसके विज्ञापन विडियो पर



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इसकी भारत में कीमत है 6,590.00 रूपए .

इसके बारे में अधिक जानकारी या इसे खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें . 


अब अगर आप महंगा स्मार्ट टीवी खरीदने की सोच रहें है तो एक विकल्प ये भी हो सकता है .

आ गया नया फ़ायरफ़ॉक्स


आ गया नया फ़ायरफ़ॉक्स

फ़ायरफ़ॉक्स अपने निर्धारित कार्यक्रम से थोडा देर से तो चल रहा है पर अपने इस  इन्टरनेट ब्राउजर को लगातार  करने में लगा हुआ है इसी क्रम में अब  फ़ायरफ़ॉक्स का नया संस्करण  उपलब्ध है नया फ़ायरफ़ॉक्स 16 .



इसमें जो मुख्य बदलाव हुए हैं वो हैं -

  • Firefox on Mac OS X now has preliminary VoiceOver support turned on by default
  • Initial web app support (Windows/Mac/Linux)
  • Acholi localization added
  • New Developer Toolbar with buttons for quick access to tools, error count for the Web Console, and a new command line for quick keyboard access
  • CSS3 Animations, Transitions, Transforms and Gradients unprefixed in Firefox 16
  • Improvements around JavaScript responsiveness through incremental garbage collection
  • Recently opened files list in Scratchpad implemented

इसमें संभव है की आपको कोई ज्यादा फर्क महसूस न हो पर जावा स्क्रिप्ट में जो बदलाव किया है उसकी वजह से पेज लोड होने का समय थोडा तेज तो हो ही गया है .

और एक सबसे खास खूबी जो इसमें आपको मिलेगी वो है
New Developer Toolbar. इस तक पहुँचने के लिए Tools menu  >> web developer >> Developer toolbar पर जाइये .
अब आपको अपने ब्राउजर के ससे नीचे एक टूलबार दिखाई देने लगेगा .
यहाँ आप कमांड देकर और अन्य तरीकों से फायरफोक्स में कुछ अतिरिक्त विशेष काम कर पायेंगे .
जैसे मान लीजिये आप बिना किसी एड ऑन के फायरफोक्स में खुले वेबपेज का स्क्रीन शोट  लेना चाहते हैं तो बस ये नया डेवलपर टूलबार शुरू कीजिये और
screenshot fullpage.jpg 0 true

ये कमांड टाइप कर दीजिये आपका स्क्रीनशॉट आपके डाउनलोड फोल्डर में तैयार हो जाएगा .

ऐसे बहुत से कमांड है कोशिश रहेगी की उनकी एक सूची किसी पोस्ट में आपक तक पहुंचाई जाए .




फिर से आते है इस नए फ़ायरफ़ॉक्स पर ये मुफ्त ब्राउजर है सिर्फ 17.3 एमबी आकार  में .

 इसे डाउनलोड करने यहाँ क्लिक करें . 

दूसरी अतिरिक्त डाउनलोड लिंक यहाँ है . 

जीमेल की छोटी पर उपयोगी नयी सुविधा



 जीमेल की छोटी पर उपयोगी नयी सुविधा
जीमेल पर अगर आप क्षेत्रीय  भाषाओ और हिंदी में ज्यादा काम करते है तो आपके लिए जीमेल अब थोडा और बेहतर हो गया है .

अगर आपने अपने जीमेल में हिंदी शुरू नहीं की है तो जीमेल में  Settings आइकन पर क्लिक कर  Setting >> Language >>Enable Input Tools पर जाकर इसे शुरू कर सकते हैं .
और फिर यहीं Edit Tools लिंक पर क्लिक कर हिंदी या अन्य किसी भाषा में  transliteration सुविधा शुरू कर सकते हैं .

पहले
transliteration की सुविधा का उपयोग करने के लिए  ईमेल कम्पोज करते हुए हर बार अ  बटन पर क्लिक करके हिंदी में टाइप करना होता था .

पर अब गूगल ने ये बटन सिर्फ इमेल कम्पोज बॉक्स से हटाकर पूरे इमेल के लिए लगा दिया है .

जैसा के आप चित्र में देख ही सकते हैं ये अलग से मुख्य टूल बार में दिखाई दे रहा है .
बस एक बार इसे क्लिक कीजिये और हर इमेल में हिंदी टाइप करना शुरू कर सकते हैं .


अब आते है इस सुविधा की सबसे अच्छी बात पर आपने एक बार
बटन पर क्लिक कर  transliteration शुरू कर दिया तो फिर जीमेल चैट में भी बिना किसी एड ऑन या किसी अन्य सॉफ्टवेयर की मदद के सीधे हिंदी में ही टाइप कर सकते हैं . 


और अंग्रेजी में टाइप करना हो तो बस एक क्लिक से इस सुविधा  को बंद कर अंग्रेजी को शुरू कर सकते हैं .

तो जाइये अपने जीमेल अकाउंट पर इस नयी सुविधा को जांचने के लिए .

चाय पीने वाले इस खबर को पढ़कर खुश हो जाएंगे...ना पीने वाले भी जरूर पढ़ें


 चाय पीने वाले इस खबर को पढ़कर खुश हो जाएंगे...ना पीने वाले भी जरूर पढ़ें

चाय पीना और पिलाना आज हमारे दैनिक आवभगत के पेय में सम्मिलित हो चुका है,क्या गांव शहर शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो, जिसने अपने जीवन में चाय की चुस्कियों का एहसास न लिया हो,अभी हाल के ही एक शोध में यह बताया गया है, कि प्रतिदिन तीन कप काली चाय (बिना दूध वाली) पीना रक्तचाप को कम करने में मददगार होता है।

यह खबर उन लोगों के लिए एक खुशखबरी हो सकती है,जो अपने दिन की शुरुआत ही चाय से करते हैं। युनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न आस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने बिना दूध वाली काली चाय पर किये गए अध्ययन से इस बात की पुष्टि की है(दूध डालकर बनायी गयी चाय पर ऐसे परिणामों की पुष्टि अभी बाकी है), पूर्व में भी ऐसे कई परिणाम सामने आ चुके हैं, जो चाय के हृदय पर अच्छे प्रभाव की पुष्टि कर चुके हैं।

प्रमुख शोधकर्ता जोनाथन होजसन ने आस्ट्रेलिया के अखबार डेली मेल को बताया कि यह अध्ययन चाय और हृदय रोगों के बीच के सम्बन्ध को स्थापित करने कि दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज होगा। हृदय द्वारा सम्पूर्ण शरीर को रक्त छोडऩे के दौरान उत्पन्न धड़कन का दबाव सीसटोलिक एवं हृदय द्वारा रक्त को लेने की स्थिति में उत्पन्न धड़कन का दवाब डायस्टोलिक को रक्तचाप के दौरान मापा जाता है।

35 से 75 आयु के 95 लोगों में कराये गए अध्ययन, जिनको प्रतिदिन तीन कप काली चाय पिलाई गई और एक दूसरा प्लेसिबो समूह जिसे किसी और स्रोत से प्राप्त कैफीन पिलाया गया में इस परीक्षण के परिणाम छ: महीने के बाद उक्त प्लेसीबो समूह से तुलनात्मक रूप में अध्ययन द्वारा देखे जाने पर यह पाया गया कि जिन लोगों ने काली चाय पी थी उनका सीसटोलिक एवं डायस्टोलिक रक्तचाप 2-3  घट गया। शोधकर्ताओं का मानना है, कि दो से तीन की रक्तचाप में कमी, उच्च रक्तचाप एवं हृदयरोगों की संभावना को दस प्रतिशत तक कम कर देती है। यह अध्ययन आर्चीव ऑफ इंटर्नल मेडीसिन में प्रकाशित हुआ है ...।

कम्पूटर स्क्रीन का विडियो केसे बनायें

  पिछले दिनों आपने अंकित के ब्लॉग प्रथम पर एक विडियो ट्युटोरियल देखा होगा और देख कर आपको भी जिज्ञासा हुयी होगी कि केसे बनाया जाता है मुझे भी कई दिनों से यह जिज्ञासा थी और जालतंत्र पर विचरण करते हुए इस जिज्ञासा को शांत करने का उपाय भी मिल गया तो सोचा आपको भी बता दूँ |

दरअसल कम्पूटर कि स्क्रीन का विडियो बनाने के लिए किसी कैमरे कि जरुरत नही पड़ती इसके लिए कुछ सॉफ्टवेर है जिनकी सहायता से आप अपने कम्पूटर पर कोई भी काम करतें है उसकी स्क्रीन का विडियो बना सकतें है साथ ही हेडफोन कि सहायता से विडियो में अपनी आवाज भी रिकार्ड कर अकते है विडियो केसी क्वालिटी का बनाना है इसका आप्शन भी इन सॉफ्टवेर में है और सबसे अच्छी बात इनका फ्री होना है इस सुविधा से आप किसी भी तरह का विडियो ट्युटोरियल बना सकतें है |
बस सॉफ्टवेर डाउनलोड करे ,अपने कम्पूटर में इंस्टाल करे ,अपने कम्पूटर कि स्क्रीन का विडियो रिकार्ड करे ,सेव करे व Youtube या अन्य वेबसाइट पर लोड कर पुब्लिश करदें |
सॉफ्टवेर यहाँ से डाउनलोड करे
यहाँ भी और सॉफ्टवेर उपलब्ध है
free-screen-capture.com
smallvideosoft.com
fox-magic.com
camstudio.org

ऑडियो कैसेट से सी डी केसे बनाये



पिछले दिनों मेरे पास एक कविता जो ऑडियो कैसेट में थी जो कई दोस्तों ने सी डी में मांग ली,मेने कैसेट बनाने वाली कंपनी से भी सी डी के लिए संपर्क किया लेकिन उसकी सी डी मुझे कहीं भी उपलब्ध नही हो सकी कई जगह पूछताछ करने के बाद आख़िर एक फोटोग्राफर ने मुझे अपने कम्प्यूटर में लगे ऑडियो वीडियो केप्चर कार्ड के द्वारा ऑडियो कैसेट से सी डी बनाकर दी लेकिन उस सी डी की आवाज भी ज्यादा अच्छी नही बनी | आख़िर मुझे गूगल बाबा की याद आई और जेसे ही मेने गूगल बाबा से पूछा की ऑडियो कैसेट को अपने कम्प्यूटर में केसे फीड करूँ ,गूगल ने धडाक से कई परिणाम निकाल कर मेरे सामने रख दिए और सम्बंधित कई जालतंत्रों पर विचरण करने बाद आख़िर मुझे तरीका मिल ही गया और झट से मेने सम्बंधित सोफ्टवेयर डाउनलोड कर अपने कम्प्यूटर में इंस्टाल कर लिया और में ऑडियो कैसेट की कविता अपने कम्प्यूटर में फीड करने में सफल रहा | और कभी आपको भी ऐसी जरुरत पड़ सकती है इसलिए जानकारी के लिए तरीका यहाँ लिख रहा रहा हूँ
१-सबसे पहले यहाँ से सोफ्टवेयर डाउनलोड कर अपने कम्प्यूटर में इंस्टाल करें ( यहाँ में दो सोफ्टवेयर के लिंक दे रहा हूँ आप अपनी इच्छा से कोई एक डाउनलोड करले
१- सोफ्टवेयर न. १ यहाँ से डाउनलोड करे 

२- अपने टेप रिकार्डर को तार द्वारा अपने कम्पूटर से जोड़ ले (जहाँ आप अपना हेड फोन कंप्यूटर में लगाते है वहां तीन छिद्र होते है आप बीच वाले छेद में टेप रिकार्डर की पिन डालकर तार जोड़ ले )
३- सम्बंधित सोफ्टवेयर रन करे ,टेप रिकार्डर प्ले करे और रिकार्डिंग शुरू करदे |

कंप्यूटर ड्राइवर्स का बेकअप कैसे ले


 

कंप्यूटर ड्राइवर्स का बेकअप कैसे ले 

कई बार कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम करप्ट हो जाता है या कोई ऐसा वायरस आ जाता है कि कंप्यूटर को फोर्मेट कर दुबारा से ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टाल करने के अलावा कोई उपाय नही बचता और दुबारा ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टाल करने के बाद कंप्यूटर के सारे ड्राईवर जेसे आडियो ड्राईवर ,डिसप्ले ड्राईवर आदि सभी दुबारा से इंस्टाल करने करने पड़ते है और कंप्यूटर कई दिन पुराना होने कि वजह से उसके साथ मिली मदर बोर्ड की सी डी या घिस जाती है ,ख़राब हो जाती या कई बार गुम भी हो जाती है ऐसे हालत में ड्राईवर इंस्टाल करना मुश्किल हो जाता है और हमें न चाहते हुए भी किसी हार्डवेयर इंजिनियर के पास जाना पड़ता है लेकिन इस मुश्किल को दूर करने के लिए जालतंत्र पर एक सोफ्टवेयर मौजूद है वो भी फ्री में | यह सोफ्टवेयर आपके कंप्यूटर में इंस्टाल सभी ड्राईवर का बेकअप ले लेता है और इन्हे दुबारा इंस्टाल भी कर देता है साथ ही इसके उपयोग करने का तरीका भी बहुत आसान है बस यहाँ से डाउनलोड करिए और अपने कंप्यूटर में इंस्टाल कर लीजिये अब आप इंस्टाल सभी ड्राइवर्स का बेक अप ले सकते है और पुराने इंस्टाल ड्राइवर्स को अपग्रेड भी कर सकते है
डाउनलोड करने लिए यहाँ चटका लगाये
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